14 May 2026

जमीन घोटाले पर बड़ा वार, डीएम सविन बंसल ने जब्त किए पुराने अभिलेख

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उप निबंधक विकासनगर अपूर्वा सिंह के निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई की शासन को संस्तुतिय

देहरादून, । जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा उप निबंधक कार्यालय विकासनगर में किए गए औचक निरीक्षण में गंभीर अनियमितताओं, स्टांप चोरी तथा अवैध रजिस्ट्रियों का बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप निबंधक विकासनगर अपूर्वा सिंह के निलंबन एवं विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व हितों की सुरक्षा, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण तथा पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी ने गत 4 मई को उप निबंधक कार्यालय विकासनगर में औचक निरीक्षण एवं छापेमारी की थी। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर महत्वपूर्ण अभिलेख जब्त कर जांच प्रारंभ की गई।

जांच में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख पत्र कार्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में डंप पाए गए। कई पंजीकृत दस्तावेज महीनों और वर्षों तक कार्यालय में रोके जाने के तथ्य भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान 25 रजिस्ट्रियां बिना किसी कारण अभिलिखित अथवा संबंधित पक्षों को सूचित किए बिना लंबित पाई गईं, जिनके संबंध में संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका।

सबसे गंभीर मामला मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि से जुड़ा पाया गया। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान गोल्डन फॉरेस्ट के खातों में लगभग 150 अवैध एवं गैरकानूनी रजिस्ट्रियां पकड़ी हैं। प्रारंभिक जांच में विक्रय हेतु प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्रियां किए जाने के मामले सामने आए हैं, जो न्यायालयीय आदेशों एवं नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। प्रशासन को जांच में यह भी जानकारी मिली है कि वर्षों से प्रतिबंधित भूमि की सैकड़ों रजिस्ट्रियां की गईं, जिनमें तत्कालीन कर्मचारियों एवं अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जिला प्रशासन के अनुसार इस प्रकार की अवैधानिक रजिस्ट्रियों से न केवल राजस्व की भारी क्षति हुई, बल्कि भूमि क्रेताओं के साथ धोखाधड़ी जैसी स्थिति भी उत्पन्न हुई है। निरीक्षण एवं प्रारंभिक जांच में धारा 47-ए के अंतर्गत स्टांप शुल्क चोरी से संबंधित 47 प्रकरण चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि मामला करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान से जुड़ा हो सकता है।

निरीक्षण के दौरान कार्यालय संचालन में पारदर्शिता की कमी, अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही, प्रक्रियात्मक नियमों के उल्लंघन तथा रिकॉर्ड प्रबंधन में गंभीर खामियां भी सामने आई हैं। जिलाधिकारी ने सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच कर समग्र रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

जिला प्रशासन वर्तमान के साथ-साथ पूर्व में तैनात सभी सब-रजिस्ट्रारों के कार्यकाल के दौरान हुई संदिग्ध गतिविधियों की भी गहन जांच कर रहा है। प्रकरण से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है, ताकि दोषियों के विरुद्ध आवश्यक विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशन में जिला प्रशासन देहरादून राजस्व एवं भूमि संबंधी मामलों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रहा है। पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनहितकारी प्रशासन सुनिश्चित करना शासन और जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा भविष्य में भी इस प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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