11 October 2026

गुरु भक्ति के जयकारों के बीच शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट

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देहरादून। अटूट श्रद्धा, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के पावन वातावरण में सिखों के विश्वविख्यात तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर गुरु महाराज के चरणों में शीश नवाया और सरबत के भले की अरदास की। ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से संपूर्ण तीर्थ परिसर गूंज उठा। सिख धर्म की मर्यादाओं और परंपराओं के अनुरूप श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को श्रद्धापूर्वक शोभायात्रा के साथ सचखंड में सुशोभित किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष की पवित्र हेमकुंड साहिब यात्रा का विधिवत समापन हो गया।

कपाट बंद होने के अवसर पर आयोजित धार्मिक समारोह का शुभारंभ सुखमनी साहिब के पाठ से हुआ। इसके पश्चात श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी सिंह गुरदियाल सिंह एवं उनके जत्थे ने मधुर शबद-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को गुरुवाणी के आध्यात्मिक रस में सराबोर कर दिया। वातावरण गुरु भक्ति और वाहेगुरु के सिमरन से भक्तिमय हो उठा। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार यात्रा की अंतिम अरदास की गई और गुरु महाराज को पूरे सत्कार के साथ सचखंड पहुंचाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर सुख-शांति, समृद्धि और समस्त मानवता के कल्याण की कामना की।

सेवा, समर्पण और सहयोग के लिए जताया आभार
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, भारतीय सेना, राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि दुर्गम पर्वतीय परिस्थितियों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में इनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।

उन्होंने विभिन्न गुरुद्वारों में सेवा निभाने वाले सेवादारों और कर्मचारियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि निस्वार्थ सेवा, अटूट श्रद्धा और समर्पण सिख परंपरा की आत्मा हैं। सेवादारों की मेहनत और सेवा भावना ने यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने जानकारी दी कि रतूड़ा गुरुद्वारा अब संगत के लिए खुल चुका है।

ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने भी सभी गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि संगत के अनुशासन, आपसी सहयोग और सेवा भावना ने यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्री बने ऐतिहासिक पल के साक्षी
इस वर्ष श्री हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई सहित विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। समारोह का विशेष आकर्षण पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों का जत्था रहा। इन श्रद्धालुओं ने पवित्र स्थल के दर्शन कर कपाट बंद होने के इस महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर में सहभागिता की।

प्रतिकूल मौसम पर भारी पड़ी श्रद्धालुओं की आस्था
हिमालय की दुर्गम वादियों में स्थित श्री हेमकुंड साहिब में हल्की बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। मौसम की कठिन परिस्थितियों के बीच भी आस्था का सैलाब उमड़ता रहा। कपाट बंद होने के दिन लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाया और अरदास की।

कपाट बंद होने के साथ ही हेमकुंड साहिब की वादियों में इस वर्ष की तीर्थयात्रा का समापन हो गया। अब शीतकाल के दौरान गुरुद्वारा साहिब के कपाट बंद रहेंगे और श्रद्धालु वर्ष 2027 में आगामी यात्रा शुरू होने की प्रतीक्षा करेंगे। गुरु भक्ति, सेवा, समर्पण और मानव कल्याण का संदेश देकर संपन्न हुई यह यात्रा संगत के हृदय में अविस्मरणीय आध्यात्मिक स्मृतियां छोड़ गई।

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