24 August 2026

आस्था और संस्कृति का पर्व है हिलजात्रा, पांच सौ वर्षों से जीवंत है परंपरा : धामी

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाली पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा सोमवार को आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम के जरिए हिलजात्रा महोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर पिथौरागढ़ की जनता को हिलजात्रा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिलजात्रा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आस्था, विश्वास, लोक परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। मां गौरा और भगवान महेश्वर की पूजा-अर्चना से प्रारंभ होने वाले सातू-आठू पर्व की भक्ति धारा से जुड़ी हिलजात्रा प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश लेकर आती है। उन्होंने कामना की कि इस पावन पर्व की कृपा से सभी के जीवन में खुशहाली बनी रहे।
500 वर्षों से चली आ रही परंपरा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पांच सौ वर्षों से अधिक समय से मनाया जा रहा हिलजात्रा पर्व सोरघाटी की विशिष्ट पहचान बन चुका है। यह पर्व हमारी धार्मिक आस्था के साथ-साथ पहाड़ी जीवन के संघर्ष, साधना, कृषि और पशुपालन पर आधारित ग्रामीण जीवन की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। हिलजात्रा हमारी उन गौरवशाली परंपराओं की याद दिलाती है, जिन्हें हमारे पूर्वजों ने सदियों से संजोकर रखा है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव के गण लखिया भूत का आगमन हिलजात्रा में सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व समाज को अपनी जड़ों, संस्कारों और पूर्वजों की महान परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता है।
बाबा गंगनाथ मंदिर का होगा सौंदर्यीकरण
मुख्यमंत्री ने ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देवभूमि के प्राचीन मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और सनातन परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं।
मानसखंड के मंदिरों को मिल रहा भव्य स्वरूप
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास के साथ-साथ अपनी विरासत और आध्यात्मिक पहचान को भी सहेज रहा है। केदारखंड की तर्ज पर मानसखंड के पौराणिक मंदिरों के पुनरुत्थान, संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर, विवेकानंद कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसे महत्वपूर्ण प्रकल्प उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान प्रदान करेंगे। सरकार का लक्ष्य देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करना है।
गांवों की खुशहाली पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पर्यटन को केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उत्तराखंड को वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। गांवों की खुशहाली के लिए होम-स्टे योजना, लखपति दीदी और सौर स्वरोजगार योजना को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से पहाड़ के हुनर, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
युवाओं से संस्कृति की विरासत संभालने का आह्वान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिलजात्रा जैसे पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी जड़ों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझने तथा उसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अंत में हिलजात्रा पर्व की पुनः शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि भगवान शिव, मां गौरा और देवभूमि की पावन शक्तियों की कृपा से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की निरंतर वर्षा होती रहे।
कार्यक्रम में विधायक बिशन सिंह चुफाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी, जनपद स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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